बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण का संदेश, सरकारी नौकरियों में आरक्षण का किया उल्लेख

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार, 11 अक्टूबर को देहरादून स्थित आईआरटीडी सभागार में आयोजित बालिका शिक्षा प्रोत्साहन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा, सम्मान और अवसरों को लेकर राज्य सरकार के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए लागू 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का भी उल्लेख किया।

महिला सशक्तीकरण और बालिका शिक्षा लंबे समय से सामाजिक विकास के महत्वपूर्ण विषय रहे हैं। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में शिक्षा और रोजगार तक पहुंच बढ़ाना विशेष महत्व रखता है, क्योंकि कई ग्रामीण क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण युवाओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

क्या है क्षैतिज आरक्षण?

क्षैतिज आरक्षण का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक श्रेणियों के भीतर संबंधित समूहों को प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराना होता है। उत्तराखंड में महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान महिला उम्मीदवारों की भागीदारी बढ़ाने से जुड़ा है। इसका व्यावहारिक क्रियान्वयन संबंधित भर्ती नियमों, पात्रता शर्तों और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार होता है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार के अवसरों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना और सरकारी सेवाओं में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है। सरकारी नौकरी मिलने से केवल व्यक्ति की आर्थिक स्थिति ही नहीं बदलती, बल्कि परिवार की शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

बालिका शिक्षा क्यों है जरूरी?

बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करना किसी एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित विषय नहीं है। शिक्षा से लड़कियों को रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और निर्णय लेने की क्षमता मिलती है। इसके साथ ही कम उम्र में विवाह, शिक्षा बीच में छोड़ने और आर्थिक निर्भरता जैसी चुनौतियों को कम करने में भी शिक्षा की अहम भूमिका होती है।

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्कूलों तक पहुंच, शिक्षकों की उपलब्धता, छात्रावास, डिजिटल शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधाओं को मजबूत करना जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को यदि अपने आसपास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मार्गदर्शन उपलब्ध हो, तो उन्हें पढ़ाई के लिए बड़े शहरों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

सरकारी दावों के साथ जरूरी है जमीनी क्रियान्वयन

महिला सशक्तीकरण के लिए योजनाओं की घोषणा के साथ उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी है। आरक्षण का वास्तविक लाभ पात्र महिलाओं तक पहुंचे, भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी रहे और नियुक्तियों में अनावश्यक देरी न हो, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

इसी तरह बालिका शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों का मूल्यांकन नामांकन के साथ-साथ स्कूल छोड़ने की दर, परीक्षा परिणाम, उच्च शिक्षा में भागीदारी और रोजगार के अवसरों के आधार पर भी किया जाना चाहिए।