कुंजापुरी मेले के स्वर्ण जयंती वर्ष का आगाज, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया उद्घाटन

उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन, स्थानीय संस्कृति और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले के 50वें संस्करण का शुभारंभ रविवार, 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नरेंद्रनगर में किया। यह आयोजन क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और पर्यटन की संभावनाओं को सामने लाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक झांकियों का अवलोकन किया और विकास प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न विभागों की ओर से लगाए गए स्टॉलों पर उपलब्ध गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी भी ली। आयोजन में धार्मिक परंपराओं के साथ स्थानीय संस्कृति और विकास से जुड़े विषयों को स्थान दिया गया।

शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक और स्वतंत्रता सेनानी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश के लिए योगदान देने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने विधिवत दीप प्रज्वलित किया और मां कुंजापुरी के चित्र के समक्ष पूजा-अर्चना की। मेले के स्वर्ण जयंती वर्ष का आयोजन क्षेत्र के लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस तरह के आयोजन स्थानीय परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भूमिका निभाते हैं।

पर्यटन और स्थानीय रोजगार की संभावनाएं

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों, प्राकृतिक दृश्यों और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे मेलों से स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों, खानपान और छोटे व्यवसायों को पहचान मिलने की संभावना रहती है।

हालांकि, पर्यटन से वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब स्थानीय युवाओं और कारोबारियों को पर्याप्त अवसर मिलें। इसके लिए परिवहन, पार्किंग, स्वच्छता, सुरक्षा, आवास और पर्यटक सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन आवश्यक है। स्थानीय उत्पादों को बिक्री के लिए उचित मंच उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होगा।

स्थानीय लोगों की क्या हैं उम्मीदें?

मेले से स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों का विस्तार होगा और इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। आयोजन के दौरान प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां स्थानीय पहचान को मजबूत करने में मदद कर सकती हैं।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि मेले से जुड़े पर्यटन प्रचार को सालभर की गतिविधियों में कैसे बदला जाता है और स्थानीय लोगों तक इसका आर्थिक लाभ कितना पहुंचता है। केवल आयोजन तक सीमित रहने के बजाय यदि पर्यटन सुविधाओं में निरंतर सुधार किया जाए, तो नरेंद्रनगर और आसपास के क्षेत्रों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।